वर्तमान समय मे प्रत्येक शोध वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र मे आगे बढ रहा है , अब तक विश्व मे सभी उन्नति शोध के माध्यम से हि सम्भव है बिना शोध के किसी भि कार्य को पूरा नही कर सकते है बेस्ट ओर काहन ने शोध विधि को तीन भाग मे बाटा है

  • वर्णनात्मक शोध
  • ऐतिहासिक शोध
  • प्रायोगिक शोध

वर्णनात्मक शोध

आपको नाम से हि पता चल रहा है होगा कि इस शोध मे होता क्या है , इस प्रकार का शोध स्थिति का वर्णन करता है , क्या है , क्या था , क्या होगा , जैसे प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करता है ,इस मे मुख्य रुप से सर्वेक्षण का काम जाता है , इसका एक विशिष्ट उद्देश्य होता है यह सरल व कठो भी होता है , इसका सम्बन्ध किसी व्यक्ति से न हो कर जनसंख्या से होता है

वर्णनात्मक शोध

शोध के समस्या के कथन को स्प्ष्ट करना होता है , उचित शोध विधि का चुनाव किया जाता है , शोध विधि के उद्देश्य को सुनिश्चित करना होता है पस्तावित अनुसंन्धान का पूर्वानुमान लगाना होता है

ऐतिहासिक शोध

आपको नाम से हि पता चल गया होगा कि इस शोध विधि मे भूत काल से सम्बन्धित कार्य करना होता है , यह शोध विधि अतीत काल पर निर्भर रहता है , अतीत को देख कर वर्तमान को समझना ओर भविष्य के लिये सतर्क रहना होता है , इस शोध विधि मे उन विषयो का शोध किया जाता है जिसका किसी अन्य प्रकार से शोध नही किया जा सकता है इस मे दो तथ्य पर विशेष बल दिया जाता है , ऐसे क्षेत्र मे प्रवेश करना जिसका पता न लगा हो ओर पुराने शोध का संशोधन करना ऐतिहासिक शोध का प्रयोग ऐतिहासिक पृष्टभूमि मे हि सम्भव है पाडुलिपि आदि मे आकडा या तथ्य से सम्बन्धित सामग्री मे हि सम्भव है अगर ये है तब ये सम्भव है

प्रयोगात्मक शोध

प्रयोग शोध विधि मे बल प्रयोग पर दिया जाता है , आपको नाम से हि ज्ञात हो गया होगा कि इस शोध मे अनुसंधान को हि महत्व दिया जाता है , इस शोध मे एक अध्ययनकर्ता को पहले अध्ययनकर्ता द्वारा प्राप्त निषकर्ष पर शंका है तो वह दुबारा से प्रयोग के द्वारा परिक्षण कर सकता है , यह विधि वस्तुनिष्ठ होती है प्रयोग कर्ता को खास तरिके से प्रयोग करना होता है । इस शोध विधि मे जोड तोड पर ज्यादा बल दिया जता है

आज आपने यह जाना है कि शोध विधि कोन कोन सी है ओर उनका कार्य क्या क्या है

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