शोध नैतिकता को शोध कार्य का महत्वपूर्ण अंग है , शोध शोध कार्य दीर्घ काल तक चलने वाला कार्य है जिसको क्रमबद्ध तरिके से करना बहुत जरुरी है जो अनेक चरणो मे पूर्ण होती है । शोध कार्य धैर्य पूर्वक करना चाहिये ,जल्दबाजी मे किया गया शोध त्रुटि पूर्ण होता है

कोई भी शोध कार्य पूर्ण होने पर भविष्य के लिये बहुत उपयोगी होता है शोधकर्ता को शोध करते समय समस्या के समाधान मे कुछ मुख्य बातो का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है

  • गहन अध्ययन
  • स्वविवेक
  • बैद्धिक कौशल

शोध नैतिकता शोध के जिम्मेदार आचरण के लिये दिशा निर्देश करता है , जब हम शोध नैतिकता के बारे मे सोचते है तब हम सही ओर गलत के बीच भेद करने वाले नियम को देखते है , शोध रिपोटर्स को रिपोर्ट करना शोध नैतिकता का विषय हो जाता है अनुसंन्धान नैतिकता का बहुत बार प्रत्यक्ष संबंध समस्या प्रतिपादन से ओर शोध निषकर्ष से प्रतिवेदित होता है

शोध नैतिक तभी होगा जब उदारता की गोपनियता अज्ञानता निश्चित होगी शोध नैतिकता को अच्छा करने के लिये शोधार्थी को ही शोध कार्य सोपना चाहिये

नैतिकता का सिद्धान्त

  1. शोध मे ईमानदारीपूर्वक आकडो , परीणाम , विधियो के साथ प्रकाशन को रिपोर्ट तैयार करे ।
  2. शोध मे किसी भी प्रकार के पूर्वग्रह व भ्रान्त अवधारणाओ से बचना चहिये ।
  3. शोध मे व्यक्तिपरकता को शामिल नही करना चहिये ।
  4. शोध प्रक्रिया मे गंभीर व ध्यानपूर्वक कार्य करना चहिये ।
  5. अनुमति के बिना प्रकाशित डाटा , विधियो , व परीणामो का प्रयोग न करें।
  6. शोध ‘ सर्वजन हिताय ‘ होता है ।
  7. यह एक स्वतंत्र व स्वभाविक प्रक्रिया है ।
  8. यह विश्वसनीय प्रक्रिया है ओर ये ज्ञान वृधि मे सहायक है ।
  9. शोध मानव गरिमा , गोपनियता , स्वायत्ता का सम्मान करता है ।
  10. यह एक कलात्मक सृजनात्मक प्रक्रिया है
  11. यह मानवीयता के गुणो से परीपूर्ण है ।
  12. अनुसंधान कार्य भविष्य के लिये उपयोगी होता है ।

आज आपको अनुसंधान के नैतिकता के बारे मे जानने को मिला है

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